गोपाला
गाय की सजल , कजरारी , ममतामयी आंखें सहज ही किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं| बचपन से ही गाय के प्रति मेरा विशेष प्रेम रहा है| गौ माता के प्रति यही प्रेम भाव आगे चलकर मेरे बेटे में भी देखने को मिला| जब वह छोटा था तो घर के सामने से निकलने वाली हर छोटी बड़ी गाय को गगा- गगा कहकर बुला लिया करता| मुझे आज भी वह दिन अच्छे से याद है , जिस दिन , उन्हीं में से एक गाय ने हमारे गेट पर ही एक बेहद ही सुंदर धवल शिशु को जन्म दिया था| जिस प्रकार एक बच्चा नया खिलौना पाकर खुश होता है ठीक उसी प्रकार मेरे बेटे की खुशी का तो मानो कोई ठिकाना ही नहीं था| गाय का वह बच्चा मेरे बेटे के लिए एक नए खिलौने समान ही था| सावन का महीना लग चुका था| एक दिन जो बारिश की झड़ी लगी तो मानो रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी| यह देखकर मेरे बेटे को गाय के उस नवजात शिशु की चिंता सताने लगी| वह कहने लगा कि लगातार हो रही बारिश में तो वह छोटा सा बच्चा बीमार हो जाएगा| वह निरंतर जिद करने लगा कि जब तक बरसात नहीं रुक जाती , क्यों न गाय और उसके बच्चे को हम लोग अपने घर में ही रख लें? कहीं ना कहीं, मन ही मन में...