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Showing posts from June, 2021

गोपाला

 गाय की सजल , कजरारी , ममतामयी आंखें सहज ही किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं| बचपन से ही गाय के प्रति मेरा विशेष प्रेम रहा है| गौ माता के प्रति यही प्रेम भाव आगे चलकर मेरे बेटे में भी देखने को मिला| जब वह छोटा था तो घर के सामने से निकलने वाली हर छोटी बड़ी गाय को गगा- गगा कहकर बुला लिया करता| मुझे आज भी वह दिन अच्छे से याद है , जिस दिन , उन्हीं में से एक गाय ने हमारे गेट पर ही एक बेहद ही सुंदर धवल शिशु को जन्म दिया था| जिस प्रकार एक बच्चा नया खिलौना  पाकर खुश होता है ठीक उसी प्रकार मेरे बेटे की खुशी का तो मानो कोई ठिकाना ही नहीं था| गाय का वह बच्चा  मेरे बेटे के लिए एक  नए खिलौने समान  ही था| सावन का महीना लग चुका था| एक दिन जो बारिश की झड़ी लगी तो मानो रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी| यह देखकर मेरे बेटे को गाय के उस नवजात शिशु की चिंता सताने लगी| वह कहने लगा कि लगातार हो रही बारिश में तो वह छोटा सा बच्चा बीमार हो जाएगा| वह निरंतर जिद करने लगा कि जब तक बरसात नहीं रुक जाती , क्यों न गाय और उसके बच्चे को हम लोग अपने घर में ही रख लें? कहीं ना कहीं, मन ही मन में...

मेरा इडली प्रेम

 पिछले दो ब्लॉग में मार्मिक प्रसंग प्रस्तुत करने के पश्चात , आज मैं आपके समक्ष हास्य पुट से परिपूर्ण एक संस्मरण लेकर प्रस्तुत हूं| तो आइए, समय के पहिए को 11 वर्ष पीछे की ओर घुमाते हैं| यह उन दिनों की बात है जब मैं पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से एम .एड. कर रही थी| मेरा बेटा उस समय मात्र 5 वर्ष का था और कक्षा एक का छात्र हुआ करता था| देखने में हम मां बेटे बेहद दुबले-पतले से प्राणी थे| उन्हीं दिनों हमारे यहां एक नए किराएदार का आगमन हुआ| उनकी श्रीमती जी मेरी हम उम्र  थीं एवं उनके दोनों पुत्र मेरे बेटे के हम उम्र थे| वे बड़ी ही मिलनसार एवं सामाजिक प्रवृत्ति की महिला थीं| वह अक्सर ही कॉलोनी की अन्य श्रीमतीयों को अपने यहां चाय नाश्ते पर आमंत्रित करती रहती थीं| इसी श्रंखला में एक दिन उन्होंने मुझे , मेरी जेठानी, भतीजे और बेटे समेत आमंत्रित किया| बड़े ही उत्साह पूर्वक उन्होंने बताया कि, इडली बना रही हूं आइएगा जरूर |किसी कारणवश जेठानी और भतीजा जाने में असमर्थ थे तो मैं अपने बेटे   को लेकर ठीक समय पर पहुंच गई| आरंभिक औपचारिकता के बाद उन्होंने अत्यंत ही मनोरम सुसज्जित प्ले...