मां

 मैडम !आपकी इंग्लिश भाषा पर पकड़ बहुत अच्छी है |अपने सहकर्मी द्वारा कहे गए ये शब्द सुनकर मुझे अत्यंत गौरवान्वित महसूस  हुआ  एवं मैंने उस को धन्यवाद कहा |परंतु अंग्रेजी भाषा में मेरी दक्षता का श्रेय ना तो पूर्ण रूप से मुझे जाता है और ना ही मेरे अध्यापक -अध्यापिकाओं को| इसका सम्पूर्ण श्रेय जाता है तो सिर्फ मेरी मां को|  ऐसा हरगिज़ नहीं है  कि अंगरेजी भाषा का ज्ञान मुझे मेरी मां से प्राप्त हुआ हो, क्योंकि मेरी मां की स्वयं  की शिक्षा-दीक्षा हिंदी माध्यम से ही पूर्ण हुई थी परंतु ,मेरी अंग्रेजी में दक्षता के पीछे मेरी मां का ही हाथ है| रूढ़िवादिता एवं पूर्वाग्रह से ग्रसित कुछ पड़ोसी एवं रिश्तेदार मां से अक्सर कहा करते थे कि ,क्यों अपनी लड़की को इतने महंगे अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाती हो ?क्यों नहीं उसको भी मोहल्ले की अन्य लड़कियों की तरह  हिंदी माध्यम के सरकारी स्कूल में भेजती? जहां शिक्षा शुल्क भी कम है |तब मेरी मां उनसे सिर्फ यह कहती कि वह अपने बेटे और बेटी में कोई भेदभाव नहीं करती एवं जिस तरह की शिक्षा दीक्षा उन्होंने अपने दोनों बेटों के लिए सुनिश्चित की थी ,ठीक वही शिक्षा-दीक्षा वह अपनी बेटी को भी देंगी| मां के उस दृढ़ निश्चय ने आज मुझे उस मुकाम पर पहुंचा दिया है कि आप मेरा लिखा हुआ ब्लॉग रुचि लेकर पढ़ रहे हैं| धन्यवाद|

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